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उ॒त व्र॒तानि॑ सोम ते॒ प्राहं मि॑नामि पा॒क्या॑ । अधा॑ पि॒तेव॑ सू॒नवे॒ वि वो॒ मदे॑ मृ॒ळा नो॑ अ॒भि चि॑द्व॒धाद्विव॑क्षसे ॥

English Transliteration

uta vratāni soma te prāham mināmi pākyā | adhā piteva sūnave vi vo made mṛḻā no abhi cid vadhād vivakṣase ||

Pad Path

उ॒त । व्र॒तानि॑ । सो॒म॒ । ते॒ । प्र । अ॒हम् । मि॒ना॒मि॒ । पा॒क्या॑ । अध॑ । पि॒ताऽइ॑व । सू॒नवे॑ । वि । वः॒ । मदे॑ । मृ॒ळ । नः॒ । अ॒भि । चि॒त् । व॒धात् । विव॑क्षसे ॥ १०.२५.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:25» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:11» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:3


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन् ! (उत) अवश्य (ते व्रतानि) तेरे नियमों-आदेशों को (अहम्) मैं उपासक (पाक्या प्र-मिनामि) विपक्व प्रज्ञा से प्रकृष्टरूप में प्राप्त होता हूँ पालन करता हूँ (अध) पुनः (सूनवे पिता-इव) तू पुत्र के लिये पिता की भाँति वर्तता है (नः मृळ) हमें सुखी कर (अभि चित्-वधात्) कदाचिद् होनेवाले घातक प्रहार से भी रक्षा कर (वः-मदे वि) तेरे हर्षप्रद शरण में विशेषरूप से हम रहें। (विवक्षसे) तू महान् है ॥३॥
Connotation: - विशेष परिपक्व बुद्धि से परमात्मा के आदेशों को पालन करना चाहिये। वह पुत्र को पिता के समान होनेवाले घातक प्रहार से बचाता है ॥३॥
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन् ! (उत) अपि-अवश्यम् (ते व्रतानि) तव नियमान्-आदेशान् (अहम्) अहमुपासकः खलु (पाक्या प्र-मिनामि) विपक्वप्रज्ञया प्रगच्छामि-प्रकृष्टं पालयामि “मिनाति, गतिकर्मा” [निघ० २।१४] (अध) अनन्तरम् (सूनवे पिता-इव) त्वं च पुत्राय पिता-इव यथा भवति तथा (नः-मृळ) अस्मान् सुखय (अभिचित्-वधात्) कदाचिद् वधादपि सुखय रक्षेत्यर्थः (वः-मदे वि) तव हर्षप्रदशरणे विशिष्टतया वयं भवेम (विवक्षसे) त्वं महानसि ॥३॥