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अथा॑ ते॒ अन्त॑मानां वि॒द्याम॑ सुमती॒नाम्। मा नो॒ अति॑ ख्य॒ आ ग॑हि॥

English Transliteration

athā te antamānāṁ vidyāma sumatīnām | mā no ati khya ā gahi ||

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Pad Path

अथ॑। ते॒। अन्त॑मानाम्। वि॒द्याम॑। सु॒ऽम॒ती॒नाम्। मा। नः॒। अति॑। ख्यः॒। आ। ग॒हि॒॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:4» Mantra:3 | Ashtak:1» Adhyay:1» Varga:7» Mantra:3 | Mandal:1» Anuvak:2» Mantra:3


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

जिसने सूर्य्य को बनाया है, उस परमेश्वर ने अपने जानने का उपाय अगले मन्त्र में जनाया है-

Word-Meaning: - हे परम ऐश्वर्ययुक्त परमेश्वर ! (ते) आपके (अन्तमानाम्) निकट अर्थात् आपको जानकर आपके समीप तथा आपकी आज्ञा में रहनेवाले विद्वान् लोग, जिन्हों की (सुमतीनाम्) वेदादिशास्त्र परोपकाररूपी धर्म करने में श्रेष्ठ बुद्धि हो रही है, उनके समागम से हम लोग (विद्याम) आपको जान सकते हैं, और आप (नः) हमको (आगहि) प्राप्त अर्थात् हमारे आत्माओं में प्रकाशित हूजिये, और (अथ) इसके अनन्तर कृपा करके अन्तर्यामिरूप से हमारे आत्माओं में स्थित हुए सत्य उपदेश को (मातिख्यः) मत रोकिये, किन्तु उसकी प्रेरणा सदा किया कीजिये॥३॥
Connotation: - जब मनुष्य लोग इन धार्मिक श्रेष्ठ विद्वानों के समागम से शिक्षा और विद्या को प्राप्त होते हैं, तभी पृथिवी से लेकर परमेश्वरपर्य्यन्त पदार्थों के ज्ञान द्वारा नाना प्रकार से सुखी होके फिर वे अन्तर्यामी ईश्वर के उपदेश को छोड़कर कभी इधर-उधर नहीं भ्रमते॥३॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

येनायं सूर्य्यो रचितस्तं कथं जानीमेत्युपदिश्यते।

Anvay:

हे परमैश्वर्य्यवन्निन्द्र परमेश्वर ! वयं ते तवान्तमानामर्थात्त्वां ज्ञात्वा त्वन्निकटे त्वदाज्ञायां च स्थितानां सुमतीनामाप्तानां विदुषां समागमेन त्वां विजानीयाम। त्वन्नोऽस्मानागच्छास्मदात्मनि प्रकाशितो भव। अथान्तर्यामितया स्थितः सन्सत्यमुपदेशं मातिख्यः कदाचिदस्योल्लङ्घनं मा कुर्य्याः॥३॥

Word-Meaning: - (अथ) अनन्तरार्थे। निपातस्य चेति दीर्घः। (ते) तव (अन्तमानाम्) अन्तः सामीप्यमेषामस्ति तेऽन्तिकाः, अतिशयेनान्तिका अन्तमास्तत्समागमेन। अत्रान्तिकशब्दात्तमपि कृते पृषोदरादित्वात्तिकलोपः। अन्तमानामित्यन्तिकनामसु पठितम्। (निघं०२.१६) (विद्याम) जानीयाम (सुमतीनाम्) वेदादिशास्त्रे परोपकारे धर्माचरणे च श्रेष्ठा मतिर्येषां मनुष्याणां तेषाम्। मतय इति मनुष्यनामसु पठितम्। (निघं०२.३) (मा) निषेधार्थे (नः) अस्मान् (अतिख्यः) उपदेशोल्लङ्घनं मा कुर्याः (आगहि) आगच्छ॥३॥
Connotation: - यदा मनुष्या धार्मिकाणां विद्वत्तमानां सकाशाच्छिक्षाविद्ये प्राप्नुवन्ति तदा पृथिवीमारभ्य परमेश्वरपर्यन्तान् पदार्थान् विदित्वा सुखिनो भूत्वा पुनस्ते नैव कदाचिदन्तर्यामीश्वरोपदेशं विहायेतस्ततो भ्रमन्तीति॥३॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - जेव्हा माणसे धार्मिक श्रेष्ठ विद्वानांच्या संगतीने शिक्षण व विद्या प्राप्त करतात तेव्हा पृथ्वीपासून परमेश्वरापर्यंत पदार्थांच्या ज्ञानाने विविध प्रकारे सुखी होतात. त्यानंतर ते अंतर्यामी ईश्वराच्या उपदेशाला सोडून कधी इकडे तिकडे भ्रमित होत नाहीत. ॥ ३ ॥