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आ॒सां पूर्वा॑सा॒मह॑सु॒ स्वसॄ॑णा॒मप॑रा॒ पूर्वा॑म॒भ्ये॑ति प॒श्चात्। ताः प्र॑त्न॒वन्नव्य॑सीर्नू॒नम॒स्मे रे॒वदु॑च्छन्तु सु॒दिना॑ उ॒षास॑: ॥

English Transliteration

āsām pūrvāsām ahasu svasṝṇām aparā pūrvām abhy eti paścāt | tāḥ pratnavan navyasīr nūnam asme revad ucchantu sudinā uṣāsaḥ ||

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Pad Path

आ॒साम्। पूर्वा॑साम्। अह॑ऽसु। स्वसॄ॑णाम्। अप॑रा। पूर्वा॑म्। अ॒भि। ए॒ति॒। प॒श्चात्। ताः। प्र॒त्न॒ऽवत्। नव्य॑सीः। नू॒नम्। अ॒स्मे इति॑। रे॒वत्। उ॒च्छ॒न्तु॒। सु॒ऽदिनाः॑। उ॒षसः॑ ॥ १.१२४.९

Rigveda » Mandal:1» Sukta:124» Mantra:9 | Ashtak:2» Adhyay:1» Varga:8» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:18» Mantra:9


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - जैसे (आसाम्) इन (पूर्वासाम्) प्रथम उत्पन्न जेठी (स्वसॄणाम्) बहिनों में (अपरा) अन्य कोई पीछे उत्पन्न हुई छोटी बहिन (अहसु) किन्हीं दिनों में अपनी (पूर्वाम्) जेठी बहिन के (अभ्येति) आगे जावे और (पश्चात्) पीछे अपने घर को चली जावे वैसे (सुदिनाः) जिनसे अच्छे-अच्छे दिन होते वे (उषसः) प्रातःसमय की वेला (अस्मे) हम लोगों के लिये (नूनम्) निश्चययुक्त (प्रत्नवत्) जिसमें पुरानी धन की धरोहर है उस (रेवत्) प्रशंसित पदार्थ युक्त धन को (नव्यसीः) प्रति दिन अत्यन्त नवीन होती हुई प्रकाश करे (ताः) वे (उच्छन्तु) अन्धकार को निराला करें ॥ ९ ॥
Connotation: - जैसे बहुत बहिनें दूर दूर देश में विवाही हुई होती उनमें कभी किसी के साथ कोई मिलती और अपने व्यवहार को कहती है, वैसे पिछिली प्रातःसमय की वेला वर्त्तमान वेला के साथ संयुक्त होकर अपने व्यवहार को प्रसिद्ध करती है ॥ ९ ॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ।

Anvay:

यथासां पूर्वासां स्वसॄणामपरा काचिद्भगिन्यहसु केषु चिदहःसु पूर्वां भगिनीमभ्येति पश्चात् स्वगृहं गच्छेत् तथा सुदिना उषासोऽस्मे नूनं प्रत्नवद्रेवन्नव्यसीः प्रकाशयन्तु ता उच्छन्तु च ॥ ९ ॥

Word-Meaning: - (आसाम्) (पूर्वासाम्) ज्येष्ठानाम् (अहसु) दिनेषु। अत्र वाच्छन्दसीति रोरभावे नलोपः। (स्वसॄणाम्) भगिनीनाम् (अपरा) (पूर्वाम्) (अभि) (एति) प्राप्नुयात् (पश्चात्) (ताः) (प्रत्नवत्) प्रत्नः प्राचीनो निधिर्विद्यते यस्मिन् (नव्यसीः) नवीयसीः (नूनम्) निश्चितम् (अस्मे) अस्मभ्यम् (रेवत्) प्रशस्तपदार्थयुक्तं द्रव्यम् (उच्छन्तु) तमो विवासयन्तु (सुदिनाः) शोभनानि दिनानि याभ्यस्ताः (उषासः) उषसः प्रभाताः। अत्रान्येषामपीति दीर्घः ॥ ९ ॥
Connotation: - यथा बहवो भगिन्यो दूरे दूरे देशे विवाहिताः कदाचित्कयाचित्सह काचिन्मिलती स्वव्यवहारमाख्याति तथा पूर्वा उषसो वर्त्तमानया सह संयुज्य स्वव्यवहारं प्रकटयन्ति ॥ ९ ॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - जशा दूर देशी राहणाऱ्या पुष्कळ विवाहित भगिनी एकमेकींना भेटून आपल्या व्यवहाराची माहिती देतात तशी पूर्वीची उषेची वेळ वर्तमान वेळेबरोबर संयुक्त होऊन व्यवहार प्रकट करतात. ॥ ९ ॥