57 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
शाला बनाने की विधि का उपदेश।[इस सूक्त का मिलान अथर्व काण्ड ३ सूक्त १२ से करो]
पदार्थान्वयभाषाः - (प्रतीच्याः दिशः) पश्चिम दिशा से... म० २५ ॥२७॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को योग्य है कि पूर्वादि सब दिशाओं से पुष्कल अन्न आदि पदार्थ संग्रह करके शाला में रक्खें, जिस में विद्वान् लोग वेदों का विचार करते रहें ॥२५-३१॥
टिप्पणी: २७−(प्रतीच्याः) अ० ३।२६।३। पश्चिमायाः सकाशात् ॥
