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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (ताम्) उस [विराट्] को (देवः) ज्ञानी (सविता) सर्वप्रेरक पुरुष ने (अधोक्) दुहा है, (ताम् ऊर्जाम्) उस बलवती को (एव) अवश्य (अधोक्) दुहा है ॥३॥
भावार्थभाषाः - ज्ञानी पुरुषार्थी पुरुष ईश्वरशक्ति से उपकार लेते हैं ॥३॥
टिप्पणी: ३−(देवः) गतिमान्। ज्ञानवान् (सविता) सर्वप्रेरकः पुरुषः (ऊर्जाम्) बलवतीम् (एव) अवश्यम्। अन्यद् गतम् ॥
