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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
विघ्नों के हटाने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (मे) मेरे लिये (शतम्) सौ (च च) और (सहस्रम्) सहस्र (अपवक्तारः) निन्दक व्यवहार हैं, (ऋतजाते) हे सत्य में उत्पन्न हुई (ऋतावरी) हे सत्यशील, (ओषधे) हे तापनाशक शक्ति परमेश्वर ! (मधुला) ज्ञान वा मिठास देनेवाली तू (मे) मेरे लिये (मधु) ज्ञान वा मिठास (करः) कर ॥११॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥११॥ इति तृतियोऽनुवाकः ॥
टिप्पणी: ११−शब्दार्थः प्रथममन्त्रेण समानः सुगमश्च ॥
