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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्म की उत्तमता का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [हे ब्रह्म !] (मे) मेरे लिये तू (अश्मवर्म) पत्थर के घर [के समान दृढ़] (असि) है। (यः) जो (अघायुः) बुरा चीतनेवाला मनुष्य (ऊर्ध्वायाः) ऊपरवाली (दिशः) दिशा से.... म० १ ॥६॥
टिप्पणी: ६−(ऊर्ध्वायाः) उपरि वर्तमानायाः ॥
