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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
रोगनाश करने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (जाग्रद्दुःष्वप्न्यम्)जागते में बुरे स्वप्न और (स्वप्नेदुःष्वप्न्यम्) सोते में बुरे स्वप्न को ॥९॥ (परा वहन्तु-म० ७) दूर पहुँचावें ॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य ईश्वरनियमको छोड़कर कुपथ्य करतेहैं, वे अनेक महाक्लिष्ट रोग भोगते हैं॥७-९॥
टिप्पणी: ९−(जाग्रद्दुःष्वप्न्यम्) जाग्रदवस्थायां दुष्टस्वप्नम् (स्वप्नेदुःष्वप्न्यम्) स्वप्नावस्थायां दुष्टस्वप्नम् ॥
