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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माके अन्तर्यामी होने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (ऊर्ध्वायाः दिशः) ऊँची दिशा के (अन्तर्देशात्) मध्य देश से (महादेवम्)महादेव [बड़े प्रकाशमय] परमेश्वर को (इष्वासम्) हिंसा हटानेवाला (अनुष्ठातारम्)साथ रहनेवाला (अकुर्वन्) उन [विद्वानों] ने बनाया ॥१२॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥१२, १३॥
टिप्पणी: १२, १३−(ऊर्ध्वायाः)उपरिवर्तमानायाः (महादेवम्) महाप्रकाशमयम्। अन्यत् पूर्ववत् स्पष्टं च ॥
