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य आ॑दि॒त्यंक्ष॒त्रं दिव॒मिन्द्रं॒ वेद॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

य: । आदित्यम् । अन्नम् । दिवम् । इन्द्रम् । वेद ॥१०.११॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:10» पर्यायः:0» मन्त्र:11


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

अतिथिसत्कार की महिमा का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो [पुरुष] (क्षत्रम्) क्षत्रियसमूह को (आदित्यम्) सूर्य [सूर्यसमान तेजस्वी] और (दिवम्)प्रकाशमान राजनीति को (इन्द्रम्) ऐश्वर्य (वेद) जानता है ॥११॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य प्रजापालन मेंदक्ष और सुनीतिप्रचार में चतुर होकर ऐश्वर्य बढ़ावें ॥१०, ११॥
टिप्पणी: ११−(यः) पुरुषः (आदित्यम्) सूर्यवत्तेजोमयम् (क्षत्रम्) क्षत्रियकुलम् (दिवम्) दिवु द्युतौ गतौच-डिवि। दीप्यमानां राजनीतिम् (इन्द्रम्) ऐश्वर्यम् (वेद) जानाति ॥