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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
गृहआश्रम का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (बृहस्पतिना)बृहस्पति....। (यत्) जो (यशः) यश [दान शूरता आदि से बड़ा नाम] (गोषु) विद्वानोंमें (प्रविष्टम्) प्रविष्ट है, (तेन) उससे.... [मन्त्र ५३] ॥५६॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ५३ के समान है॥५६॥
टिप्पणी: ५६−(यशः) दानशूरतादिप्रभवं सुनाम। अन्यद् गतम् ॥
