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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
गृहआश्रम का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (बृहस्पतिना)बृहस्पति....। (यत्) जो (तेजः) तेज (गोषु) विद्वानों में (प्रविष्टम्) प्रविष्टहै, (तेन) उससे.... [मन्त्र ५३] ॥५४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ५३ के समान है॥५४॥
टिप्पणी: ५४−(तेजः) ज्योतिः। अन्यत् पूर्ववत्-म० ५३ ॥
